बस शायद ...... और शायद ..... यूँ
Saturday, September 29, 2012
Monday, September 10, 2012
जीवन पथ जटिल है ये , कालचक्र कठिन है ये ,
पग - पग पे भेद भाव है , रक्त - रंजित पाँव है ,
जन्म से किसी के सर वंश की छाँव है ,
झूठ के रथ पे सवार डाकुओ का गाँव है ,
किसी के पास है छल - कपट , किसी को रूप का वरदान है ,
ये सोच के मत बैठ जा की ये विधि का विधान है ,
बज रहा मृदंग है, ये कहता - अंग अंग है ,
की प्राण अभी शेष है , मान अभी शेष है ,
उठा ले ज्ञान का धनुष ,
एक कण भी और कुछ माँग मत भगवान से ,
ज्ञान की कमान पे लगा दे तू विजय तिलक ,
काल के कपाल पे लिख दे तू ये गुलाल से ,
" कि रोक सकता है कोई तो रोक के दिखा मुझे ,
हक़ छीनता आया है जो अब छीन के बता मुझे "
ज्ञान के मंच पर सब एक सामान है ,
विधि का विधान पलट दे , वो ब्रहमास्त्र ज्ञान है ,
सिर्फ ज्ञान ही आपको आपका हक़ दिलाता है।
पग - पग पे भेद भाव है , रक्त - रंजित पाँव है ,
जन्म से किसी के सर वंश की छाँव है ,
झूठ के रथ पे सवार डाकुओ का गाँव है ,
किसी के पास है छल - कपट , किसी को रूप का वरदान है ,
ये सोच के मत बैठ जा की ये विधि का विधान है ,
बज रहा मृदंग है, ये कहता - अंग अंग है ,
की प्राण अभी शेष है , मान अभी शेष है ,
उठा ले ज्ञान का धनुष ,
एक कण भी और कुछ माँग मत भगवान से ,
ज्ञान की कमान पे लगा दे तू विजय तिलक ,
काल के कपाल पे लिख दे तू ये गुलाल से ,
" कि रोक सकता है कोई तो रोक के दिखा मुझे ,
हक़ छीनता आया है जो अब छीन के बता मुझे "
ज्ञान के मंच पर सब एक सामान है ,
विधि का विधान पलट दे , वो ब्रहमास्त्र ज्ञान है ,
सिर्फ ज्ञान ही आपको आपका हक़ दिलाता है।
Tuesday, November 29, 2011
Saturday, October 15, 2011
Sunday, September 25, 2011
किस्मत
किस्मत वो शब्द जिसे हर कोई जानना चाहत है बड़ा ही विचित्र किस्म का शब्द है | कोई जान कर भी अनजान है और जो नहीं जानता वो उलझन में है | आखिर क्या लिखा है किस्मत मै काश जान पाते तो चन्द ख़ुशी के पल लिख देते
Wednesday, September 21, 2011
वक़्त
आज जो मिले ख़ुशी से हम कल गम भी हमने ख़ुशी से बाटें थे
थे रेत की राहों पे और सिमटे थे साहिल की बाहों में
आज महसूस हुई जो लहरों की चोट तो समझ में आया
ना हम तुम्हारे थे ना तुम हमारे थे
ये तो वक़्त की ज़रुरत थी तुम्हारी जो तुम मेरे किनारे थे
जो अब राहें हैं अकेली और हम भी हैं तनहा
तो याद आता है वो लम्हा जब तुम हमारे और हम तुम्हारे थे
Wednesday, August 17, 2011
सहर
कल रात हुआ कुछ यूँ की नींद में भी हम जागे थे
तमना थी तेरे आगोश की
जिसे पाने की चाहत में सारी सहर हम जागे थे
तमना थी तेरे आगोश की
जिसे पाने की चाहत में सारी सहर हम जागे थे
Subscribe to:
Posts (Atom)
झूट
तेरे हर झूट पे यकीन करने का मन करता है पर क्या करें तेरा हर सच बहुत कड़वा होता है
-
तेरी हर आरज़ू मेरी चाहत बन जाये तेरी हर शाम मेरे नाम हो जाये जो पूरा हुआ ये खवाब तो खुदा की इनायत तेरी इबादत बन जाये
-
तेरे हर झूट पे यकीन करने का मन करता है पर क्या करें तेरा हर सच बहुत कड़वा होता है
-
एक तरफ़ा प्यार जो हमने किया , जुदा होकर वो चले गए तो हमें कोई गिला न हुआ हमने तो उनकी हर नज़र में अपने को दूंढा लेकिन उन नज़रों में सब मिले ब...